मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दिखाई भाखड़ा विस्थापितों को जीने की राह

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दिखाई भाखड़ा विस्थापितों को जीने की राह
हजारों भाखड़ा विस्थापितों के चेहरे पर उम्मीद की लौट आई किरण
विस्थापितों के हितों की रक्षा के लिए नड््डा के प्रयासों को भुलाया नहीं जा सकता

बिलासपुर , तृप्ता ठाकुर :  मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा भाखड़ा विस्थापितों की चिरलंबित मांग को लेकर कैबिनेट में नई नीति बनाते हुए इस समस्या का जहां स्थायी समाधान करने का प्रयास किया गया है वहीं प्रदेश सरकार के इस प्रयास से हजारों भाखड़ा विस्थापितों के चेहरे पर उम्मीद की किरण लौट आई है। लेकिन सरकार इस पालिसी में केवल बिलासपुर नगर में बसे विस्थापितों और गैर विस्थापितों को राहत पहुंचाने तक ही सीमित न हो बल्कि उन विस्थापितों की भी सुध ली जाए जो डैम बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बसे है।

आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बसने वाले भाखड़ा विस्थापित तरह तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति के अध्यक्ष देशराज शर्मा ने बैठक करते हुए कही कि करीब 60 साल बीत जाने के बाद भी बिलासपुर ऊना के विस्थापितों की समस्याएं वैसी की वैसी ही हैं, आज भी लोग सही तरीके से पुनर्वास को तरस रहे हैं। देश की तरक्की तथा उत्तरी भारत को रोशन करने के लिए भाखड़ा विस्थापितों की कुर्बानी को वर्तमान सरकारों द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है हैरानी की बात तो यह है कि राजनीति ने केवल भाखड़ा विस्थापितों को एक मुद्दे से ज्यादा और कुछ नहीं समझा है।

बिलासपुर से निकले राजनेताओं ने आज दिन तक इस संवेदनशील में विधानसभा और लोकसभा में नहीं रखा है जब भी चुनाव आते हैं तो विस्थापितों को विकास के सब्जबाग दिखाए जाते हैं और मतलब निकलने के बाद विस्थापितों का कोई हाल नहीं पूछता। ग्रामीण क्षेत्रों में विस्थापितों की समस्या और भी दयनीय है। गांवों में भाखड़ा विस्थापितों के बिजली, पानी तक के कनेक्शन काट दिए गए लेकिन किसी जनप्रतिनिधि ने भी आवाज तक नहीं उठाई। अध्यक्ष देश राज ठाकुर ने बताया कि वर्ष 1993 में जगत प्रकाश नड्डा ने विस्थापितों की आवाज को उठाने का बीड़ा उठाया था तथा विस्थापितों को नड्डा से बहुत उम्मीदें हैं। विस्थापितों के हितों की रक्षा और समस्याओं के लिए नड््डा के प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

वर्तमान में जेपी नड्डा देश के अहम औहदे पर आसीन हैं तथा भाखड़ा विस्थापितों के मसले पर अपने स्तर पर भरसक प्रयास कर रहे हैं, जिसके परिणाम दिख भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग इलाके के विकास को लेकर अपने प्रतिनिधि चुनते हैं लेकिन लोग हर बार की तरह अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं। भाखड़ा विस्थापितों की नब्बे प्रतिशत जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है लेकिन आज भी ग्रामीणों को मुख्यालय तक पहुंचने के लिए भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। देशराज शर्मा ने कहा कि भंजवाणी पुल जकातखाना, ज्योरिपतन पुल, नंद नगरांव पुल व बागछाल पुल छह दशकों के बाद भी नहीं बन पाए हैं। भाखड़ा बांध निर्माण के साथ-साथ इन पुलों का निर्माण भी होना चाहिए था। उन्होंने इस बैठक में प्रदेश सरकार से मांग की है कि तमाम भाखड़ा विस्थापितों की समस्या को मध्यनजर रखते हुए स्थायी नीति का निर्माण किया जाए और लोगों को राहत दिलाई जाए।

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