86 की उम्र, 35 किलोमीटर पहाड़ पार कर पहुंच गए श्रीखंड

86 की उम्र, 35 किलोमीटर पहाड़ पार कर पहुंच गए श्रीखंड

86 वर्षीय बुजुर्ग खज्जू राम ने 35 किलोमीटर चढ़ाई बिना किसी सहारे के पूरी की है

कुल्लू, जितंेन्द्र कुमार  :  दुनिया की कठिनतम धार्मिक यात्राओं में से श्रीखंड यात्रा को 86 वर्षीय बुजुर्ग खज्जू राम ने 35 किलोमीटर चढ़ाई बिना किसी सहारे के पूरी की है। यात्रा के दौरान उम्र भी बाधा नहीं बनी। हालांकि चढ़ाई चढने में जहां इतनी उम्र होने के बावजूद बुजुर्ग ने न ही किसी का सहारा लिया और न ही हिम्मत हारी। रास्ते में कई कठिन व विपरित परिस्थितियां आई लेकिन खज्जू राम ने हिम्मत बरकरार रखी। कुल्लू जिला के आनी खंड की श्रीखंड यात्रा 15 जुलाई को शुरू हुई है जोकि 31 जुलाई तक चलेगी।

हर साल हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए श्रीखंड यात्रा पर जाते हैं। 35 किलोमीटर की पैदल यात्रा व 18750 फीट की ऊंचाई पर शिवलिंग है। आनी के श्वाड़ गांव निवासी बुजुर्ग खज्जू राम ने 12 जुलाई को थचडू से यात्रा शुरू की और 14 जुलाई को श्रीखंड महादेव के दर्शन किए। खज्जू राम ने बताया कि यात्रा के दौरान रास्ते में हालांकि कई जगहों पर परेशानी तो हुई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 12 जुलाई की रात कुंशा में विश्राम किया और इसके बाद कुंशा से सुबह सात बजे यात्रा शुरू की।

13 जुलाई को नौन सरोवर पहुंचे, जहां पर हल्की सी सांस की दिक्कत आई। लेकिन साथ गए राजेश व गोल्डी ने उनका हौसला बढ़ाया। 14 जुलाई को श्रीखंड महादेव के दर्शन किए। उन्होंने बताया उन्हें एक बार महादेव के दर्शन करने थे। काफी सालों से तमन्ना थी कि श्रीखंड महादेव के दर्शन करुंगा। पारिवारिक सदस्यों के मना करने के बावजूद भगवान शिव की कृपा से यात्रा को पूरी करने में सफलता मिली है। खज्जू राम ने बताया कि अगर शरीर स्वस्थ रहा तो अगले साल फिर श्रीखंड यात्रा पर जाउंगा। खज्जू राम के साथ यात्रा पर गए राजेश शर्मा ने बताया कि भोले के दर्शन करने के लिए महज चार दिन में 35 किलोमीटर का पैदल सफर किया है।

माता-पिता की तमन्ना की पूरी

खज्जू राम के माता-पिता ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी कि उनको बच्चा होगा तो श्रीखंड जाकर महादेव के दर्शन करेंगे। लेकिन वह आज तक श्रीखंड जाकर महादेव के दर्शन तो नहीं कर पाए। लेकिन आज इस दुनिया से चले गए हैं। खज्जू राम ने माता-पिता के सपने को साकार करनी की ठानी थी।

इस बार दो श्रद्धालुओं की हो चुकी है मौत

हिमालय की गोद में विराजमान श्रीखंड महादेव के दर्शन करना आसान नहीं है। यह जिला कुल्लू के आनी में है। निरमंड से होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने के लिए पैदल रास्ता है। दुनिया की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शामिल होने के बावजूद श्रीखंड यात्रा के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। निरमंड से श्रीखंड यात्रा के लिए 35 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई श्रद्धालुओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। इस बार इस यात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत भी हो चुकी है

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